महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पद्मविभूषण और महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित प्रख्यात खगोलशास्त्री डॉ. जयंत नारळीकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. नारळीकर के निधन से भारतीय खगोलशास्त्र ने अपना एक महान नायक खो दिया है। मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र की जनता की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने डॉ. नारळीकर की बेटी श्रीमती गिरीजा से फोन पर बात कर सांत्वना दी और उनके अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने के निर्देश दिए। आज की मंत्रिमंडल बैठक में भी डॉ. नारळीकर को श्रद्धांजलि दी गई।
अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “डॉ. नारळीकर ने भारतीय खगोलशास्त्र की नींव को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया। अपने गणितज्ञ पिता से मिली विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खगोलशास्त्र में महत्वपूर्ण शोध किए। उनके कार्य को विश्व के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों ने सराहा। भारत लौटने पर उन्होंने ‘इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA)’ की स्थापना की और इसे वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता का केंद्र बनाया। उन्होंने ‘बिग बैंग थ्योरी’ के विकल्प के रूप में नई अवधारणा भी प्रस्तुत की थी।”
उन्होंने आगे कहा, “डॉ. नारळीकर का वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रचार-प्रसार में योगदान अतुलनीय रहा। उनके लेखन ने, विशेष रूप से किशोरों में, विज्ञान के प्रति रुचि जगाई। ‘आकाशाशी जडले नाते’ और ‘चार नगरांतले माझे विश्व’ जैसे उनके साहित्यिक कार्यों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त किए। वे बच्चों और युवाओं के विज्ञान संबंधी सवालों का समाधान करने में हमेशा तत्पर रहते थे। उनके निधन से भारतीय वैज्ञानिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके परिवार के दुख में हम सहभागी हैं।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने दि श्रद्धांजलि
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “डॉ. नारळीकर ने खगोलशास्त्र में वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। पुणे में ‘आयुका’ की स्थापना कर उन्होंने विज्ञान शोध की मजबूत नींव रखी। उनका निधन देश के लिए बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी प्रेरणा भावी वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन देती रहेगी।”
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “डॉ. नारळीकर ने विज्ञान को सरल भाषा में बच्चों तक पहुंचाया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। उनकी ‘आयुका’ संस्था भारत का ज्ञान वैभव है। उनके शोध और साहित्यिक कार्य हमेशा प्रेरणादायी रहेंगे। उनके विज्ञान प्रसार के कार्य को जारी रखना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”










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