Authored by Rajni Bhagwat
मूवी डायरेक्शन में आपका इंटरेस्ट पहली बार कब आया?
मुझे बचपन से ही कहानियाँ सुनना और उन्हें अपने तरीके से सोचना बहुत पसंद था। लेकिन जब मैंने.पहली बार एक फिल्म को “कैसे बनाया जाता है” ये देखा — कैमरा मूवमेंट, लाइटिंग, और परफॉर्मेंस के तालमेल को समझा — तभी मुझे एहसास हुआ कि डायरेक्शन ही वह माध्यम है जिसके ज़रिए मैं अपनी सोच को पर्दे पर ला सकता हूँ। कॉलेज के समय एक शॉर्ट फिल्म बनाने का मौका मिला और वहीं से मेरी डायरेक्शन की यात्रा शुरू हुई।
फिल्म बनाते समय आपको रचनात्मक रूप से क्या प्रेरित करता है?
मानव भावनाएं — जैसे रिश्ते, संघर्ष, उम्मीद, और प्यार — मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित करते हैं। साथ ही समाज में हो रही छोटी-छोटी घटनाएं भी एक कहानी का बीज बन सकती हैं। जब कोई दर्शक मेरी बनाई हुई फिल्म देखकर खुद को उससे जोड़ पाता है या उस पर सोचने को मजबूर हो जाता है — वही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
आपके अनुभव के अनुसार, फिल्म सेट पर आपके सामने सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति क्या रही है, और आपने इसे कैसे हैंडल किया?
एक बार हमारी आउटडोर शूटिंग के दौरान अचानक मौसम बिगड़ गया और शूट रुक गया। पूरी यूनिट फ्रस्ट्रेटेड थी, बजट सीमित था। उस समय मैंने क्रू के साथ मिलकर सेटिंग्स को इंडोर लोकेशन में बदला और स्क्रिप्ट को उसी अनुसार एडजस्ट किया। फ्लेक्सिबिलिटी और टीमवर्क के बल पर हमनें उसी दिन जरूरी शॉट्स ले लिए। ये अनुभव सिखाता है कि डायरेक्शन सिर्फ क्रिएटिविटी नहीं, क्राइसिस मैनेजमेंट भी है।
असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका के कौन से पहलू आपको सबसे अधिक फायदेमंद और चुनौतीपूर्ण लगते हैं?
AD की भूमिका में सबसे फायदेमंद बात यह है कि आपको पूरी फिल्म के हर विभाग की जानकारी हो जाती है — कैमरा, आर्ट, एक्टर, स्क्रिप्ट, सब कुछ। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण यह होता है कि आपको सभी को समय पर कॉर्डिनेट करना होता है, हर किसी की समस्या को सुनना और डायरेक्टर के विजन को बनाए रखते हुए उसका समाधान निकालना।
क्या आपने अपने डायरेक्टर को किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने या सेट पर किसी समस्या को हल करने में किसी प्रकार की सहायता की?”
हाँ, एक बार एक इमोशनल सीन में एक्टर बार-बार ब्रेक ले रहा था और डायरेक्टर थोड़ा परेशान हो गया था। उस समय मैंने एक्टर से व्यक्तिगत बात की, उसके कैरेक्टर को लेकर कुछ भावनात्मक बातें कीं, जिससे वह जुड़ पाया और टेक क्लियर हो गया। ऐसे मौके डायरेक्टर और AD के बीच विश्वास को मजबूत करते हैं।
अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं?
अभी मैं एक फीचर फिल्म पर काम कर रहा हूँ जो उत्तर प्रदेश के एक कस्बे की पृष्ठभूमि पर आधारित कामेडी ड्रामा है। इसके अलावा एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी पोस्ट-प्रोडक्शन में है जो भारतीय संस्कृति में देव दिवाली के महत्व को दर्शाती है। दोनों ही प्रोजेक्ट्स में कंटेंट रियलिस्टिक है और दर्शकों से गहरा कनेक्शन बनाने का प्रयास किया गया है।
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